Wednesday, October 31, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रफ़ाल की क़ीमत, सरकार बोली नहीं दे सकते

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से रफ़ाल विमानों की क़ीमत के बारे में जानकारी सीलबंद लिफ़ाफ़े में देने के लिए कहा है.

चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ़ की बेंच ने बुधवार को रफ़ाल मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की.

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की ओर से रफ़ाल मामले में एफ़आईआर दर्ज करने और जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है. इनका आरोप है कि फ़्रांस से रफ़ाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद में केंद्र की मोदी सरकार अनियमितता बरती है.

इस सुनवाई में आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह की ओर से दायर याचिका को भी शामिल किया गया.

10 अक्टूबर को अधिवक्ता एमएल शर्मा और विनीत ढांढा की ओर से दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अदालत ने सरकार से रफ़ाल सौदे के बारे में जानकारी मांगी थी.

भारत और फ़्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों का सौदा हुआ है. डसॉ कंपनी के बनाए रफ़ाल लड़ाकू विमानों के इस सौदे के बारे में बहुत सी जानकारियां सार्वजनिक नहीं हुई हैं.

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने विमान सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. भारत के उद्योगपति अनिल अंबानी की नई-नवेली रक्षा कंपनी के साथ डसॉ के क़रार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं.

बुधवार को हुई सुनवाई को अहम बताते हुए अरुण शौरी ने बीबीसी को बताया, "पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ रफ़ाल सौदे की प्रक्रिया पर जानकारी मांगी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच को बहुत व्यापक कर दिया है.''

उन्होंने कहा, ''अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारियां मांगने के अलावा सरकार से ये भी पूछा है कि विमान की क़ीमत कैसे तय की गई और ऑफ़शोर पार्टनर को सौदे में कैसे शामिल किया गया."

अरुण शौरी ने कहा, "जब भारत के महाधिवक्ता ने सरकार की ओर से कहा क़ीमतें गुप्त हैं तो अदालत ने कहा कि सरकार अदालत से ये बात शपथपत्र पर कहे."

शौरी कहते हैं, "सरकार के लिए शपथपत्र पर ये बात कहना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने पहले ही जानकारी दी थी कि 126 विमानों की क़ीमत 90 हज़ार करोड़ होगी. इस हिसाब से एक विमान की क़ीमत 715 करोड़ होती. इसके बाद रक्षा राज्य मंत्री ने संसद में लिखित सवाल के जवाब में कहा था कि एक विमान की क़ीमत 670 करोड़ रुपए होगी. इसके बाद अपनी सालाना रिपोर्ट में रिलायंस और डसॉ ने कहा था कि एक विमान की क़ीमत 670 करोड़ रुपए नहीं होगी बल्कि 1670 करोड़ रुपए होगी."

केंद्र की मोदी सरकार का कहना है कि फ़्रांस से हुए रफ़ाल विमान सौदे में गोपनीयता की शर्त है. इस पर शौरी कहते हैं कि गोपनीयता की ये शर्त सिर्फ़ विमानों की तकनीकी जानकारी पर लागू होती है, क़ीमत पर नहीं.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से जब रफ़ाल विमानों की क़ीमत के बारे में सवाल किया गया था तब उन्होंने कहा था कि इसका जवाब देना भारत सरकार पर निर्भर करता है.

अरुण शौरी ने सुनवाई के बारे में कहा, "हमने जब अदालत से कहा कि वो सीबीआई से पूछे कि उन्होंने रफ़ाल सौदे को लेकर हमारी शिकायत पर क्या किया तो इस पर चीफ़ जस्टिस हँसकर बोले की अरे भैया सीबीआई से अभी जांच करवानी है क्या, उनको अपना घर तो संभाल लेने दो फिर देखेंगे."

भारत के महाधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान अदालत से कहा कि विमानों की क़ीमत के बारे में जानकारी नहीं दी जा सकती है इस पर अदालत ने महाधिवक्ता से ये बात शपथपत्र पर कहने के लिए कहा.

इस पर टिप्पणी करते हुए शौरी कहते हैं, "उन्हें शायद ये उम्मीद नहीं होगी कि अदालत ऐसा कह सकती है. वैसे आजकल सरकार के बुरे दिन चल रहे हैं, पता नहीं वो कब कहां क्या कह दें."

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "मोदी जी जिस रबर की नाव से रफ़ाल सौदे के भ्रष्टाचार को छुपा रहे थे वो फट चुकी है. रफ़ाल विमान की क़ीमत क्यों नहीं बतायी जा सकती, ये राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न कैसे हो सकता है? सीधी-सीधी बात है कि इसमें भ्रष्टाचार है. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद सिर्फ़ एक रास्ता बचा है- वो है संसद की जेपीसी. मोदी और अमित शाह बहुत दिनों तक इसे नहीं छुपा पाएंगे. क़ानून के हाथ बहुत लंबे हैं."

सूरजेवाला कहते हैं, "मोदी जी को डर था कि कहीं सीबीआई रफ़ाल मामले की जांच न कर दे, इसी डर में उन्होंने रातोरात सीबीआई के निदेशक को पद से हटाया था."

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