राजस्थान और तेलंगाना में आज मतदान हो रहा है. आम आदमी से लेकर बड़े स्टार तक पोलिंग बूथ पर वोट डालने पहुंच रहे हैं. लेकिन देश की बड़ी बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा आज मतदान नहीं कर पाईं. ज्वाला ने ट्वीट कर इस बात की शिकायत भी की.
ज्वाला गुट्टा ने पहले ट्वीट किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, जिससे वह हैरान हैं. इसके बाद उन्होंने दूसरा ट्वीट किया कि चुनाव किस तरह सही हो सकता है जब मेरा नाम ही वोटिंग लिस्ट से गायब है.
ज्वाला गुट्टा की इस शिकायत के बाद ट्विटर पर कई तरह की प्रक्रियाएं आ रही हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर लिखा कि ऐसा पूरे देश में किया जा रहा है. मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी भी अपने वोट डालने के हक के बारे में सवाल कर रही है.
बता दें कि राजस्थान और तेलंगाना में सुबह से ही मतदान जारी है. तेलंगाना में सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ. अभी तक कई बड़े स्टार मतदान कर चुके हैं. साउथ इंडस्ट्री के स्टार नागार्जुन, अर्जुन और चिंरजीवी ने सुबह-सुबह मतदान किया.
सुबह नौ बजे तक तेलंगाना में करीब 9 फीसदी तक मतदान हुआ है. तेलंगाना में कुल 119 सीटें हैं, जहां पर मतदान जारी है. तेलंगाना में कई जगह ईवीएम खराब होने की खबरें हैं.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक पिछले साल इस मैदान में एशेज के पहले मैच के लिए 55,000, उससे पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के लिए 32,255 और न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट के पहले दिन मैदान में 47,441 दर्शक मौजूद थे.
गुरुवार को दर्शकों की यह संख्या चार साल पहले भारत के खिलाफ यहां खेले गए मैच के पहले दिन से भी कम थी. उस मैच में 25,619 दर्शक मैदान में मौजूद थे. उन्होंने एसईएन रेडियो से कहा, ‘इस में कोई शक नहीं कि दिन-रात्रि टेस्ट के प्रशंसक हमसे दूर हुए हैं. हम एडिलेड में फिर से दिन-रात्रि टेस्ट मैच की तरफ लौटना चाहेंगे.’
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रॉबर्टस ने कहा उन्हें उम्मीद है कि बीसीसीआई 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया के अगले दौरे पर दिन-रात्रि टेस्ट खेलने के लिए तैयार होगा. उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा ही उम्मीद कर रहे. हम एक बार में एक कदम लेंगे. हम यह मानते हैं कि टेस्ट को लेकर उनका नजरिया अलग है. उम्मीद है कि प्रशंसकों की भावनाओं को ध्यान में रखकर हम दिन-रात्रि टेस्ट में खेल सकते है.’
Friday, December 7, 2018
Thursday, December 6, 2018
क्या स्वीडन में मिलेगा यमन के 'जख़्म' के लिए मरहम?
यमन में क़रीब चार साल से गृहयुद्ध जारी है. इस दौरान हर दिन कई जख़्म झेल चुका ये देश तबाही के मुहाने पर पहुंच गया है और हालिया वक़्त में दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है. संघर्ष के दौरान हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग भूख से मरने की कगार पर पहुंच गए हैं.
इस संघर्ष को ख़त्म करने के मक़सद से स्वीडन में शांति वार्ता शुरू हुई है. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने शांति वार्ता को अहम मील का पत्थर बताया है.
ग्रिफ़िथ्स का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बंदियों की अदला-बदली के समझौते से हज़ारों लोग अपने बिछड़े परिवारों से मिल सकेंगे. उनकी टीम यमन सरकार और हूती विद्रोहियों के प्रतिनिधियों के साथ काम कर रही है.
साल 2016 के बाद से पहली बार यमन में शांति के लिए बातचीत हो रही है. शांति की पिछली कोशिश सितंबर में की गई थी लेकिन तब हूती विद्रोहियों की ओर से जिनेवा में बातचीत के लिए प्रतिनिधि नहीं पहुंचे.
बातचीत का मक़सद क्या है?
स्वीडन की बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद नहीं की जा रही है. विश्लेषकों और पत्रकारों का कहना है कि इस दौर की बातचीत का मक़सद विद्रोहियों के कब्ज़े वाले हुदैदा बंदरगाह पर संघर्ष रोकना है. यहां हज़ारों की संख्या में आम लोग फंसे हुए हैं. इस बंदरगाह को यमन की जीवनरेखा माना जाता है.
संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि बातचीत में एक ऐसा ढांचा तैयार हो सकेगा जिससे यमन में भविष्य के राजनीतिक समाधान की तस्वीर तैयार हो सकेगी.
ग्रिफ़िथ्स ने गुरुवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पत्रकारों से कहा, "आने वाले दिनों में हमारे पास शांति प्रक्रिया को गति देने का अहम अवसर होगा."
संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि ने इस बात की भी पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने एक करार पर दस्तख़्त किए हैं. भरोसा बहाली के लिए हुए इस समझौते में दोनों तरफ से बंदियों की अदला बदली की जाएगी.
ग्रिफिथ्स ने सही संख्या की जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि इससे हज़ारों परिवारों को फायदा होगा.
बातचीत के अहम मुद्दे क्या हैं?
बातचीत की शुरुआत के पहले यमन के अधिकारियों ने ट्विटर पर मांग की कि विद्रोहियों को हुदैदा पोर्ट का अधिकार सरकार को वापस दे देना चाहिए.
इस बीच एक आला हूती विद्रोही ने सना के मुख्य एयरपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र के विमानों को रोकने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि ऐसा तब होगा जब तक बातचीत के जरिए इसे सभी यात्री उड़ानों के लिए पूरी तरह नहीं खोला जाता. संघर्ष की वजह से ये एयरपोर्ट दो साल से बंद है.
यमन की राजधानी सना पर फिलहाल हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा है. वहीं सरकार दक्षिण शहर अदन से कामकाज कर रही है.
बातचीत के पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि ग्रिफ़िथ्स 50 घायल हूती विद्रोहियों को इलाज के ओमान भेजे जाने की मंजूरी हासिल करने में कामयाब हो गए.
इस संघर्ष को ख़त्म करने के मक़सद से स्वीडन में शांति वार्ता शुरू हुई है. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने शांति वार्ता को अहम मील का पत्थर बताया है.
ग्रिफ़िथ्स का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बंदियों की अदला-बदली के समझौते से हज़ारों लोग अपने बिछड़े परिवारों से मिल सकेंगे. उनकी टीम यमन सरकार और हूती विद्रोहियों के प्रतिनिधियों के साथ काम कर रही है.
साल 2016 के बाद से पहली बार यमन में शांति के लिए बातचीत हो रही है. शांति की पिछली कोशिश सितंबर में की गई थी लेकिन तब हूती विद्रोहियों की ओर से जिनेवा में बातचीत के लिए प्रतिनिधि नहीं पहुंचे.
बातचीत का मक़सद क्या है?
स्वीडन की बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद नहीं की जा रही है. विश्लेषकों और पत्रकारों का कहना है कि इस दौर की बातचीत का मक़सद विद्रोहियों के कब्ज़े वाले हुदैदा बंदरगाह पर संघर्ष रोकना है. यहां हज़ारों की संख्या में आम लोग फंसे हुए हैं. इस बंदरगाह को यमन की जीवनरेखा माना जाता है.
संयुक्त राष्ट्र को उम्मीद है कि बातचीत में एक ऐसा ढांचा तैयार हो सकेगा जिससे यमन में भविष्य के राजनीतिक समाधान की तस्वीर तैयार हो सकेगी.
ग्रिफ़िथ्स ने गुरुवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पत्रकारों से कहा, "आने वाले दिनों में हमारे पास शांति प्रक्रिया को गति देने का अहम अवसर होगा."
संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि ने इस बात की भी पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने एक करार पर दस्तख़्त किए हैं. भरोसा बहाली के लिए हुए इस समझौते में दोनों तरफ से बंदियों की अदला बदली की जाएगी.
ग्रिफिथ्स ने सही संख्या की जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि इससे हज़ारों परिवारों को फायदा होगा.
बातचीत के अहम मुद्दे क्या हैं?
बातचीत की शुरुआत के पहले यमन के अधिकारियों ने ट्विटर पर मांग की कि विद्रोहियों को हुदैदा पोर्ट का अधिकार सरकार को वापस दे देना चाहिए.
इस बीच एक आला हूती विद्रोही ने सना के मुख्य एयरपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र के विमानों को रोकने की चेतावनी दी है. उनका कहना है कि ऐसा तब होगा जब तक बातचीत के जरिए इसे सभी यात्री उड़ानों के लिए पूरी तरह नहीं खोला जाता. संघर्ष की वजह से ये एयरपोर्ट दो साल से बंद है.
यमन की राजधानी सना पर फिलहाल हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा है. वहीं सरकार दक्षिण शहर अदन से कामकाज कर रही है.
बातचीत के पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि ग्रिफ़िथ्स 50 घायल हूती विद्रोहियों को इलाज के ओमान भेजे जाने की मंजूरी हासिल करने में कामयाब हो गए.
Tuesday, December 4, 2018
अटलजी ने कहा था- 2004 में भाजपा न हारती तो कश्मीर मसला हल हो जाता: इमरान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि जंग कश्मीर मसले का हल नहीं है। यह मसला सिर्फ बातचीत से हल हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व विदेश मंत्री नटवर लाल ने उनसे कहा था कि 2004 के लोकसभा चुनाव में अगर भाजपा न हारती तो कश्मीर मसला हल हो जाता।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इमरान ने मीडिया से बातचीत में कहा- जब तक दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं होती, कश्मीर के विकल्पों पर चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले पर दो या तीन समाधान हैं, जिस पर चर्चा होनी है। पाक पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते बनाने के प्रति गंभीर है। भारत अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के चलते पाकिस्तान से बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
करतारपुर कॉरिडोर खोलना स्पष्ट और सच्चा फैसला
पाक प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘करतारपुर कॉरिडोर खोलना एक सच्चा प्रयास है, यह कोई गुगली नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई दोहरा रवैया नहीं है, यह स्पष्ट फैसला है। इस्लामाबाद सच्ची नीयत से नई दिल्ली के साथ शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना चाहता है।’’ पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में भारत द्वारा दो केंद्रीय मंत्री भेजे जाने पर कहा था कि इमरान की गुगली में भारत फंस गया। इमरान ने गुगली फेंकी और भारत को करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास में शामिल होना पड़ा।
सरकार के 100 दिन पूरे होने पर इमरान ने 28 नवंबर को पाक की तरफ वाले करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया था। इसमें भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर, हरदीप सिंह पुरी और पंजाब के मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू शामिल हुए थे।
सुषमा ने कहा था- आपके बयान से सब उजागर हुआ
कुरैशी के इस बयान पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को ट्वीट किया था, ‘‘पाकिस्तान के विदेश मंत्री महोदय- आपके गुगली वाले बयान से आश्चर्यजनक रूप से सब उजागर हो गया। यह दिखाता है कि पाक सिखों की भावनाओं की कद्र नहीं करता। आप केवल गुगली फेंकते हैं। मैं आपको बताना चाहती हूं कि भारत आपकी गुगली में नहीं फंसा? हमारे दो सिख मंत्री करतारपुर गुरुद्वारे में अरदास करने गए थे।’’
फटकार के बाद कुरैशी ने दी थी सफाई
भारत से फटकार के बाद कुरैशी ने सफाई दी थी। कुरैशी ने ट्वीट किया था, ‘‘मेरे बयान को सिख भावनाओं से जोड़ना गलतफहमी पैदा करने और गुमराह करने की कोशिश है। मैंने जो कुछ भी कहा, वह भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत को लेकर था। हम सिख भावनाओं का सम्मान करते हैं, कितना भी विवाद हो इसे नहीं बदला जा सकता। सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखकर करतारपुर कॉरिडोर खोलने का फैसला किया गया।’’
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इमरान ने मीडिया से बातचीत में कहा- जब तक दोनों देशों के बीच बातचीत नहीं होती, कश्मीर के विकल्पों पर चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले पर दो या तीन समाधान हैं, जिस पर चर्चा होनी है। पाक पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते बनाने के प्रति गंभीर है। भारत अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के चलते पाकिस्तान से बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
करतारपुर कॉरिडोर खोलना स्पष्ट और सच्चा फैसला
पाक प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘करतारपुर कॉरिडोर खोलना एक सच्चा प्रयास है, यह कोई गुगली नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई दोहरा रवैया नहीं है, यह स्पष्ट फैसला है। इस्लामाबाद सच्ची नीयत से नई दिल्ली के साथ शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना चाहता है।’’ पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में भारत द्वारा दो केंद्रीय मंत्री भेजे जाने पर कहा था कि इमरान की गुगली में भारत फंस गया। इमरान ने गुगली फेंकी और भारत को करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास में शामिल होना पड़ा।
सरकार के 100 दिन पूरे होने पर इमरान ने 28 नवंबर को पाक की तरफ वाले करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया था। इसमें भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर, हरदीप सिंह पुरी और पंजाब के मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू शामिल हुए थे।
सुषमा ने कहा था- आपके बयान से सब उजागर हुआ
कुरैशी के इस बयान पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को ट्वीट किया था, ‘‘पाकिस्तान के विदेश मंत्री महोदय- आपके गुगली वाले बयान से आश्चर्यजनक रूप से सब उजागर हो गया। यह दिखाता है कि पाक सिखों की भावनाओं की कद्र नहीं करता। आप केवल गुगली फेंकते हैं। मैं आपको बताना चाहती हूं कि भारत आपकी गुगली में नहीं फंसा? हमारे दो सिख मंत्री करतारपुर गुरुद्वारे में अरदास करने गए थे।’’
फटकार के बाद कुरैशी ने दी थी सफाई
भारत से फटकार के बाद कुरैशी ने सफाई दी थी। कुरैशी ने ट्वीट किया था, ‘‘मेरे बयान को सिख भावनाओं से जोड़ना गलतफहमी पैदा करने और गुमराह करने की कोशिश है। मैंने जो कुछ भी कहा, वह भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत को लेकर था। हम सिख भावनाओं का सम्मान करते हैं, कितना भी विवाद हो इसे नहीं बदला जा सकता। सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखकर करतारपुर कॉरिडोर खोलने का फैसला किया गया।’’
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